चुनाव का 'त्योहार': राजनीतिक दलों और निर्वाचन आयोग की तैयारियां
नई दिल्ली, 5 जून 2025 – 'चुनाव का त्योहार है, हम तैयार हैं' – यह नारा भारतीय लोकतंत्र में चुनावी मौसम के आगमन की घोषणा बन चुका है। लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा के समय से ही यह वाक्यांश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा, निर्वाचन आयोग और विपक्षी दलों द्वारा दोहराया गया, जो चुनाव को लोकतंत्र के 'महापर्व'
के रूप में चित्रित करता है।
निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च 2024 को 18वीं लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें सात चरणों में 19 अप्रैल से 1 जून तक मतदान और 4 जून को मतगणना हुई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, "हम भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" आयोग ने 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं, 10.5 लाख मतदान केंद्रों और 55 लाख ईवीएम के साथ व्यापक तैयारियां कीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, "लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्योहार आ गया है! निर्वाचन आयोग ने 2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। हम (भाजपा-एनडीए) चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" भाजपा ने 'मोदी 3.0 लोडिंग' और 'फिर एक बार मोदी सरकार' जैसे नारों के साथ उत्साह दिखाया।
विपक्ष ने भी इसी उत्साह का जवाब दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह चुनाव 'न्याय का द्वार' खोलेगा और लोकतंत्र को बचाने का मौका है। पार्टी ने 'हैं तैयार हम' थीम के साथ नागपुर में रैली आयोजित की। अन्य दलों जैसे समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने भी तैयारियां जताईं।
यह नारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस (25 जनवरी) पर भी गूंजता है, जहां 'मतदान जैसा कुछ नहीं, मतदान अवश्य करेंगे हम' जैसी थीम्स अपनाई जाती हैं। चुनाव आयोग के अनुसार,
1.8 करोड़ नए मतदाता और बढ़ता महिला मतदाता अनुपात (948) लोकतंत्र की मजबूती दर्शाते हैं।
चुनावी तैयारियां आचार संहिता लागू होने से शुरू हुईं, जिसमें सरकारी फैसलों पर रोक लगी। भाजपा-एनडीए ने सुशासन का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जबकि विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए।
यह 'त्योहार'
न केवल उत्सव है, बल्कि लोकतंत्र की परीक्षा भी, जहां 97 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी तय करती है देश का भविष्य।
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